रविवार, 8 मई 2022

माहिए 31

 

क़िस्त 31

1

तुमने तो छुपाया है

लेकिन मैने तो

सब कुछ ही बताया है।

 

2

होगी ये मेहरबानी

आन मिलो तुम तो

बदले ये ज़िंदगानी।

 

3

दिल हार नहीं सकता

जीने की खातिर

मन मार नहीं सकता।

 

4

खुशियों का मेला है

वैसे तो जीवन का

हर रोज झमेला है।

 

5

आँखों ही आँखों में

बातें होती है

हर रात भी ख्वाबों में

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