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शुक्रवार, 5 अगस्त 2022

माहिए : क़िस्त 44 [ आज़ादी के अमृत महोत्सव 2022 के शुभ अवसर पर ] डा0 अर्चना पाण्डेय

क़िस्त 44 

[ आज़ादी के अमृत महोत्सव 2022 के शुभ अवसर पर ]- डा0 अर्चना पाण्डेय ]


तुम भूल नहीं जाना

वीर शहीदों को

कुछ पुष्प चढ़ा जाना


डिग जाए जग सारा

तुम न डिगो सच से

रस्ता ये बड़ा प्यारा


हर घर फहरे झंडा

जोश रहे दिल में

यह जोश न हो ठंडा


यह सबको ध्यान रहे

झंडा हो ऊँचा

झंडे का मान  रहे


अम्बर हरषाता है

 वीरों पर वो भी

 नेमत बरसाता है


जय हिंद का नारा है

केसरिया मेरा

इस जग से न्यारा है


डा0 अर्चना पाण्डेय---

बुधवार, 22 जून 2022

माहिए : क़िस्त 43

 

 

क़िस्त 43

1

यह साथ हमारा है

छूट नहीं सकता

जो हाथ तुम्हारा है

2

क्या ख़ूब नहाना है

प्यार की गंगा में

बस प्यार लुटाना  है

3

जीवन की अभिलाषा

होती कब पूरी

फिर भी तो है आशा

4

कैसा यह मंज़र है

बातें मीठी हैं

हाथों में ख़ंज़र है

5

ये बात पुरानी है

सुन रख्खे हम ने

 राजा है रानी है

6

मीठे कुछ राग भरो

बासंती ऋतु है

जीवन में फ़ाग भरो

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

माहिए : क़िस्त 42

  क़िस्त 42

1

यादों में बसे हो तुम

ढूँढ रही तुम को

रहते हो कहाँ पर गुम

 

2

घूँघट में छुपा लेते

चेहरा हम अपना

दर्शन तो नहीं देते


3

हम मान लिए  ग़लती

ऐसी साइत तो

हर बार नहीं मिलती


4

हर बात ज़फ़ाओं की

याद हमे रहती

हर बात दुआओं की


5

ता उम्र दुआ देंगे

साथ हमें ले लो

हर ग़म को भुला देंगे

 

डा0 अर्चना पाण्डेय [ 

सोमवार, 13 जून 2022

माहिए : क़िस्त 41

 

किस्त 41

1

आंखों के तारे हो

तुम ही तो मेरे

जीने के सहारे हो

 

2

क्या रूप सलोना था !

दिल बहला मेरा

क्या खूब खिलौना था

 

3

दिल तुम पर  दीवाना

सीख लिया हमने

हमदम ! अब इतराना

 

4

तुमको था बतलाना

तुम ने सुना ही नहीं

 अब क्या है  जतलाना ?

 

5

पाया है तुम्हे खो कर

दुनिया से तो बस

मिलता ही रहा ठोकर

 

-डा0 अर्चना पाण्डेय –

रविवार, 12 जून 2022

माहिए : क़िस्त 40

 

क़िस्त 40

1

बरसों से क्या जाना

कुछ भी नहीं समझा

 अब तक था अनजाना

 

2

तनहाई पीना है

हमको तो साक़ी

प्यासा ही जीना है

 

3

कैसा यह प्याला है

मन ही नहीं भरता

कैसी मधुशाला है ?

 

4

तुम हमसे जो रूठे

जग रूठा हमसे

सब रिश्ते हैं झूठे

 

5

वो प्यार नहीं होता

जब न कभी कोई

तकरार नहीं होता

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

माहिए : क़िस्त 39

क़िस्त 39

 

1

वो प्यार नहीं पलता

अपनापन ना हो

जीवन में नहीं ढलता

 

2

दिल प्यार से भर आया

कह न सकी  तुम से

जब तुम ने ठुकराया

 

3

किस राह से चल  आऊँ

तुम ही बता देते

मैं तुमको पा जाऊँ

 

4

वह मन के अन्दर है

ढूँढो तो पाओ

मन एक समन्दर है

 

5

 तनहाई की रातें

यादों में केवल

होती  उनसे बातें

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

 


गुरुवार, 9 जून 2022

माहिए : क़िस्त 38

 

क़िस्त 38


1

आजा मेरे मोहन

रास रचा ऐसा

यह झूम उठे मधुबन

2

कोयल मारे ताना

ओ मेरे जानम !

अब तुमको है आना

3

जीवन को सजाना है

प्यार तेरा ऐसा

अनमोल खज़ाना है

4

मत पूछो है कैसी

प्रीति हमारी है

बासंती रंग जैसी ?

5

आना था बता देते

रंगोली से हम

आँगन तो सजा लेते

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

रविवार, 5 जून 2022

माहिए : किस्त 37

 

किस्त 37

1

माथे पर चंदन है

फूलों की थाली

सादर अभिनंदन है

2

अभिनंदन वंदन है

दिल में आ जाओ

यह दिल का बंधन है

3

हर पल यह तन-मन-धन

तुझको अर्पण है

मेरा सारा जीवन

4

हम द्वार खड़े तेरे

शरण हमें देना
हारे जग के फेरे

5

यह स्नेह नहीं टूटे

जग क्या करना

जग छूटे तो छूटे

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

सोमवार, 16 मई 2022

माहिए : क़िस्त 36

 

क़िस्त 36

1

चेहरे पर लाली है

दो नैना लगते

अमृत की प्याली है

 

2

क्या रूप सलोना है

बहलाता दिल को

ज्यों एक खिलौना है

 

3

हमको तो खो जाना

प्यार के सागर में

बस तेरा हो जाना

 

4

अरमानों का घर हो

तेरे काँधे पर

मेरा  अपना सर हो

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

माहिए : किस्त 35

 

 

क़िस्त 35

1

दिल तुझ पर वारा है

और नहीं कोई

बस तू ही सहारा है

 

2

कोई भी नहीं भाता

जाने क्यों मुझको

बस याद  तू ही आता

 

3

होती है जब अनबन

तुम बिन सब सूना

कैसा यह अपनापन

 

4

यह प्यार तुम्हारा है

सागर में जैसे

तिनके का सहारा है

 

5

हम ऐसे मतवाले

प्यार किया तुमसे

हम ऐसे दिलवाले

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

माहिए : क़िस्त 34

 

 

क़िस्त 34

1

क्या नेक इरादे थे

भूल गए क्यों तुम

जो क़समें वादे थे

 

2

जब तुमको जाना था

केवल बातों से

क्या दिल बहलाना था ?

 

3

आँखे यह तरसती हैं

तुमसे मिलने को

रह रह के बरसती है

 

4

दिल के गलियारे में

होती है चर्चा

बस तेरे बारे में

5

जब तुमको नहीं पाता

दिल अपने घर में
हर पल है घबराता

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

रविवार, 8 मई 2022

माहिए 33

 

क़िस्त 33

1

महका सा चंदन है

पास जो तुम होते

खिल जाता तन मन है।

2

मेरे होकर रहना

कह दो ना तुम भी

जो तुमको है कहना।

3

मन ही मन में पाया

साथी तुम मेरे

रहना बन कर छाया

4

क्यों हम पे मरते हो

कह दो ना इतना

तुम प्यार भी करते हो।

5

संग तेरे जीना है

 तू ही मेरा काबा

 तू मेरा मदीना है

माहिए 32

 

क़िस्त 32

 

1
महकी ये हवाएँ हैं

साजन क्या आए

छाने को घटाएँ है।

 

2

थोड़ी सी हवा दे दो

हसरत है मेरी

उलफत की दवा दे दो।

 

3

तेरी बातों में हम

खो जाते हैं क्यों

हो जाते क्यों गुमसुम।

 

4

 तुमसे कुछ कहना था

कह न सकी वो मैं

ख़ामोश ही रहना था।

 

5

नदियाँ सा बहना था

सागर के द्वारे

हमको तो रहना था।

माहिए 30

 

क़िस्त 30

1

तुमसे  याराना है

दिल मेरा तुझपर

रहता दीवाना है।

2

इन प्यार की  गलियों में

तू ही नज़र आया

फूलों में कलियों में

3

ये पीर नहीं कोई

अपने हाथों से

मैंने ही थी बोई।

4

बेदर्द जमाना है

फिर भी  दिल गाता

क्या खूब तराना है।

5

मै तेरा पता लेकर

ढूँढ़ रहा तुझको

मैं खुद को सज़ा देकर