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शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

एक गीत : दीपावली पर

 एक गीत : दीपावली पर 



बरस बाद आई है फिर से दिवाली 

चलो प्यार का एक दीपक जलाएं 


सभी की खुशी के लिए हम जिए हैं

 सुधा और विष के भी प्याले पिए हैं 

बची चार दिन की है जो जिंदगानी 

उसी में से अपने लिए पल चुराएँ


  सनम मेरे बालों में गजरा सजा दो

 यह पूजा की थाली जरा तुम  उठा दो

मुंडेरों पे दीपक सजाकर ऐ हमदम 

चलो दीप की रोशनी में नहाएँ


 खुशी बाँट दो तुम मिठाई से पहले 

 रहे ना उदासी, हों चेहरे रुपहले 

 दिवाली में सब को गले से लगा कर

 सभी के लबों पर हँसी हम सजाएँ


 मेरी जिंदगी को तुम्हीं ने संवारा 

न था साथ कोई तुम्हीं ने निखारा

 करूं शुक्रिया आज फिर से तुम्हारा 

पुराने दिनों में चलो लौट जाएँ


बरस बाद आई है फिर से दिवाली 

चलो प्यार का एक दीपक जलाएँ


डॉ अर्चना पाण्डेय

रविवार, 11 अक्टूबर 2020

एक कविता 01 : गंगा सी प्यारी है ---

 कविता---गंगा सी प्यारी है----

  गंगा सी प्यारी है ,  भाषा ये हमारी है 

  इसको सजाएं हम,  हिंदी में गाएंगे हम  

  कितनी पुरानी है
  चूनर यह धानी है 
  परियों की रानी है
  माँ की कहानी है

  सबको सुनाएँ हम, हिंदी में गाएं हम

  संस्कृत की बेटी है
  यह रोजी - रोटी है 
 खुशियाँ भी समेटी है 
 हर घर में पैठी है 

इसको बढ़ाएँ हम, हिंदी में गाएँ हम।

  हिंदी में चिंतन है
  कवियों का क्रंदन है
  विषयों का मंथन है 
  शोधों का ग्रंथन है 

  बंधन निभाएंगे हम,  हिंदी में गाएँ हम।

 जग भर में रेला है.
 हिंदी का मेला है
 जन गण में फैला है 
  भावों का थैला है, 

जन-जन में लाएँगे हम,हिंदी में गाएँ हम

डॉ अर्चना पाण्डेय