रविवार, 8 मई 2022

माहिए 24

 

क़िस्त 24

1

दर्शन तो बहाना था

हमको तो केवल

तेरे दर तक आना था।

 

2

दिल हो जाता पागल

याद लिए तेरी

लहराता जब आँचल।

3

बरफीली राहों में

धूप खिली होगी

उलफ़त की निगाहों में

4

मिलना मजबूरी है

तुम तो हो अपने

क्यों इतनी दूरी है ?

5

मेरे ही सवालों में।

ज़िक्र तेरा आता

क्यों रोज खयालों  में

 

 

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