सोमवार, 16 मई 2022

माहिए : क़िस्त 36

 

क़िस्त 36

1

चेहरे पर लाली है

दो नैना लगते

अमृत की प्याली है

 

2

क्या रूप सलोना है

बहलाता दिल को

ज्यों एक खिलौना है

 

3

हमको तो खो जाना

प्यार के सागर में

बस तेरा हो जाना

 

4

अरमानों का घर हो

तेरे काँधे पर

मेरा  अपना सर हो

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

माहिए : किस्त 35

 

 

क़िस्त 35

1

दिल तुझ पर वारा है

और नहीं कोई

बस तू ही सहारा है

 

2

कोई भी नहीं भाता

जाने क्यों मुझको

बस याद  तू ही आता

 

3

होती है जब अनबन

तुम बिन सब सूना

कैसा यह अपनापन

 

4

यह प्यार तुम्हारा है

सागर में जैसे

तिनके का सहारा है

 

5

हम ऐसे मतवाले

प्यार किया तुमसे

हम ऐसे दिलवाले

 

डा0 अर्चना पाण्डेय

माहिए : क़िस्त 34

 

 

क़िस्त 34

1

क्या नेक इरादे थे

भूल गए क्यों तुम

जो क़समें वादे थे

 

2

जब तुमको जाना था

केवल बातों से

क्या दिल बहलाना था ?

 

3

आँखे यह तरसती हैं

तुमसे मिलने को

रह रह के बरसती है

 

4

दिल के गलियारे में

होती है चर्चा

बस तेरे बारे में

5

जब तुमको नहीं पाता

दिल अपने घर में
हर पल है घबराता

 

डा0 अर्चना पाण्डेय