बुधवार, 19 मई 2021

ग़ज़ल 32

 

ग़ज़ल 32 : तू मेरी आरज़ू, तू मेरा प्यार है

 

212—212---212----212

तू मेरी आरज़ू, तू मेरा प्यार है,

मुझ को तेरे सिवा कुछ न दरकार है ।

 

रोज़ ही सुर्खियाँ बन के तू छप रहा,

लग रहा तू नया कोई अख़बार है ।

 

क्या बचाएगा मुझको तू मझधार से,

तेरी टूटी हुई ख़ुद की पतवार है।

 

जालिमों के इधर बढ़ रहे हौसले,

ढूँढती हूँ कहाँ न्याय का द्वार है?

 

छोड़ दो नफ़रतें कह रही ’अर्चना’,

तुमको रचना नया एक संसार है।

 

सं 02-05-2021

ग़ज़ल 31

 

ग़ज़ल 31: उजला उजला हो जाएगा---

21—122- 21—122 =16

 

मन जब उजला हो जाएगा

मन अंधियारा सो जायेगा

 

आएंगे जब वोट नतीजे

शोर शराबा खो जाएगा

 

दाग़ जो दिल का धो लेगा तो

प्यार का मोती बो जाएगा

 

जीतेगा फिर से वो कछुवा

धीरे धीरे वो जाएगा

 

नाच रहा है खुश होकर तू

थक कर इक दिन सो जाएगा

 

नफ़रत की बाजी हारेगी

दिल में उजाला हो जायेगा

 

सं 08-05-21

मंगलवार, 18 मई 2021

ग़ज़ल 030

 

ग़ज़ल 30: अकेले अकेले जिए जा रहे---

122—122---122---122

 

अकेले अकेले जिए जा रही हूँ

ख़ुशी हो कि ग़म, मै लिए जा रही हूँ

 

वो माना कि मुझ से ख़फ़ा चल रहा है

मगर फूल उसको दिए जा रही हूँ

 

कि जिसने दिया ग़म मुझे उम्र भर का

उसी से शिकायत किए जा रही हूँ

 

ज़माना हुआ वो गया कब का लेकिन

अभी तक मैं आँसू पिए जा रही हूँ

 

यूँ कहने को बातें बहुत है मगर

लबों को मैं अपने सिए जा रही हूँ

 

अगर हो न मंज़िल निगाहों की हद में

कहाँ मैं किधर किसलिए जा रही हूँ

 

सं 11-05-21